तुम बिन - Short Love Story in Hindi by Writer Akash

Short love story in Hindi

तेज़ बारिश में गिरती पानी की हर एक बूंद को ज़मीं पर बिखरते हुए इशिता बड़े ग़ौर से बालकनी में बैठे देख रही थी जैसे वह खुद भी अपनी सभी चिंताओं और परेशानियों को पीछे छोड़ उन बूंदों जैसी ज़मीं पर बिखर जाना चाहती हो। तभी अचानक एक तेज़ हवा के झोंके से दीवार में लगी उसकी और आरुष की तस्वीर गिर के टूट गई। इशिता अपने बेडरूम में आई और कांच के टुकड़े समेटने लगी।

टूटी तस्वीर देखकर इशिता आहत हो गई...वैसे भी इन दिनों इशिता आरुष के उससे दूर चले जाने से ज्यादातर परेशान और मायूस ही रहती थी और ऐसा हो भी क्यों न, अभी कुछ दिन ही तो हुए थे उन दोनों की शादी के और दोनों को एक दूसरे से दूर रहना पड़ रहा था।

कांच के टुकड़ों को हाथ में समेटती इशिता आरुष के ख्यालों में खोने लगी और उन दोनों की कुछ पुरानी यादें उसके ज़हन में ताज़ा हो गई।

आरुष ने आवाज़ दी ‘ईशु’.....
“आयी” इशिता ने किचन से आवाज़ दी और बाहर आकर शिकायती लहज़े में कहा।
“क्या है, मैं खाना बना रही हूँ”
“जानता हूँ पर एक जरूरी काम है” आरुष ने धीमी आवाज़ में कहा।
“कोई जरूरी काम नहीं होता तुम्हे बस मुझे परेशान करने के लिए बुलाते हो” इशिता ने कहा।
आरुष कुछ पल के लिए खामोश रहा और फिर उसे एक लेटर देकर पढ़ने को कहा।

इशिता की सारी मासूम शिकायतें एक दम से बंद हो गयी और वो लेटर पढ़ने लगी जो आरुष के ऑफिस से उसके हेड ने मेल किया था।
उस लेटर में लिखा था कि आरुष को ऑफिस के काम से 1 महीने के लिए UK जाना होगा। यह पढ़ते ही इशिता चुप सी हो गयी और आरुष को देखने लगी। दोनो कुछ देर खामोशी से एक दूसरे को देखने लगे तभी आरुष, इशिता के करीब आया और कहा।

“मैं तुम्हें अकेले छोड़कर नही जाना चाहता”
“मैं जानती हूँ पर तुम्हें जाना होगा” इशिता ने नम आवाज़ में कहा।
“कुछ ही दिन तो हुए हैं हमारी शादी को…...और तुम इतने दिन कैसे रहोगी मेरे बिना” आरुष ने कहा।
“जैसे पहले अपने घर मे रहती थी….और वैसे भी सिर्फ 1 महीने की ही तो बात है इसके बाद तुम्हे प्रोमोशन भी मिल जाएगा और तुम वापस मेरे पास आ जाओगे हमेशा के लिए।”
आरुष ने इशिता को गले लगाते हुए कहा -
“I am sorry, मैं जानता हूँ तुम मुझसे दूर नही रह पाओगी वो भी एक महीने के लिए और मैं भी तुम्हें बहुत miss करूँगा पर मैं तुम्हें वहाँ नहीं ले जा सकता क्योंकि मैं ऑफिस के काम से जा रहा हूँ और वहां कोई फैमिली मेम्बर Allowed नही है। And Thanks मुझे समझने के लिए।”

इशिता ने किसी तरह आरुष को जाने के लिए हाँ तो कह दिया था पर वो आरुष के जाने की बात से मायूस थी और अपने आँसू छुपाने की कोशिश कर रही थी लेकिन वह जानती थी कि यह आरुष के लिए बहुत अच्छा अवसर है अपने करियर को बेहतर बनाने का।

आरुष के ख्यालों में खोई इशिता को ध्यान ही नही रहा कब एक कांच का टुकड़ा उसके बाएं हाथ की उंगली में चुभ गया और फिर तेज़ दर्द से वो उन ख्यालों से बाहर आई तो देखा कि कुछ बूंदें खून की ज़मीं पर गिरी थी। इशिता ने कांच के टुकड़ों को डस्टबिन में डाला और फर्स्ट एड बॉक्स में से रुई निकालकर खून साफ किया और अपनी उंगली पर पट्टी बांधी। और फिर जाकर आलमारी से अपनी डायरी निकाली।

इशिता को डायरी लिखने का बहुत शौक था वह हर दिन डायरी लिखती थी और आरुष के UK जाने के बाद तो इशिता घण्टों अपना वक्त डायरी लिखने में बिताती थी। और आज की सारी बातें वो उसमे लिखने लगी।

हाथों की अब मेंहदी बेरंग होने लगी      तमाम रात नींद से जंग होने लगी

दीवार से आज जो तस्वीर गिरके टूट गई नज़ारे ऐसे देख जीने की उमंग खोने लगी

बेफिक्रे सी रहती थी मैं साथ तुम्हारे हरदम तुम बिन डोर से टूटी कोई पतंग होने लगी 

बालकनी में बैठे रोज़ इन ख्यालों में डूब जाती हूँ कैसे खुश-रंग ज़िन्दगी हमारी बेरंग होने लगी 

सोचा ही नही ये फासला इतनी जल्द आएगा खुद के ही ख्यालों से तंग होने लगी

ऐसा ही होता है जब कोई अपना हमसे दूर चला जाता है उसके न होने का एहसास हमे अंदर ही अंदर परेशान करता है और हमें अचानक ही हमारी ज़िंदगी अधूरी लगने लगती है हालांकि वक्त के साथ सब ठीक हो जाता है। पर यही तो प्यार के दो पहलू हैं, हम खुश रहते हैं जब हमारा अपना कोई साथ होता है और वही इंसान जब हमसे दूर चला जाता है हम दुखी हो जाते हैं। इशिता और आरुष के साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा था और दोनों के रिश्ते की तो अभी नई शुरुआत हुई थी।
This Short Love Story in Hindi is Written by Writer Akash

उम्मीद करता हूँ आपको इशिता और आरुष की यह Hindi Love Story “तुम बिन” पसंद आई होगी और अगर आपको इस कहानी का 2nd पार्ट चाहिए तो कमेंट में जरूर बताएं।
धन्यवाद!💓