तसव्वुर - Hindi Poetry by Writer Akash

Writer Akash poetry

तस्व्वुर में हम उनके अब आने लगे हैं
लगता है वो हमें चाहने लगे हैं


हमसे उस बात का ज़िक्र तक नहीं करते
लेकिन मन ही मन सपने सजाने लगे हैं


किस्से प्यार वाले सुन के आँखें चमक उठती है
नाम हमारा सुनकर मुस्कुराने लगे हैं


पहले कभी उन्हें देखा नहीं यहाँ
लेकिन कुछ दिनों से हमारी गली में आने जाने लगे हैं


आयी हमें जब एक रात हिचकियाँ खूब सारी तो जाना
हमारे ख्याल में वो रातभर खुद को जगाने लगे हैं


ये नादानियाँ उनकी और मासूम अदाएं देखकर
लगता है हम भी उन्हें चाहने लगे हैं

By - Writer Akash

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